Skip to main content

ओस सफर vich oh हमसफर सी

 


ओस सफर vich
Oh हमसफर si
Par Jo आज है
Oh कल नहीं सी
Waqt है isda काम चलना
मासूमियत विच खबर नहीं सी
.
कई साल Ehve ही मे gvaate
Sad गीत कई bnaate
Likhda reha dil काबु vich रहे
Kalheya likh laye, Kalheya गाते
.
Hun na oh एहसास रहे ने
ना ही hun ओ ख्वाब रहे ने
Naviya गला karda rajan
Nave jahe hun ख्वाब sajaale.

.

आज vi wafaa di जगह hai pehli 

आ ही गाल बस रह गई pehli 

Oh te bhamba badal geya hai 

Sach सुने te sambhal गया है 

Kisay सब ohne दफनाते

Don't disturb de बोर्ड लगाते. 

(parminder singh Bhamba) 

Comments

Popular posts from this blog

भारत में ईंधन कर व्यवस्था: संगठित लूट की कहानी

🇮🇳 भारत में ईंधन कर व्यवस्था: संगठित लूट की कहानी By : Parminder Singh bhamba  भारत में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें सिर्फ़ अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के उतार-चढ़ाव पर निर्भर नहीं करतीं, बल्कि इस बात पर भी कि सरकार और तेल कंपनियाँ इनकी कीमतें कैसे तय करती हैं। पिछले दस वर्षों में ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ी हैं, और आम जनता को राहत नहीं मिली। विशेषज्ञ इसे “संगठित लूट” कहते हैं — एक ऐसी व्यवस्था जिसमें सरकार और कंपनियाँ हमेशा लाभ में रहती हैं, जबकि जनता को नुकसान उठाना पड़ता है। भारत लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। रिफाइनरी में तैयार होने के बाद पेट्रोल या डीज़ल की मूल लागत लगभग ₹35–45 प्रति लीटर होती है। इसके ऊपर केंद्र सरकार उत्पाद शुल्क लगाती है — वर्तमान में पेट्रोल पर ₹13 और डीज़ल पर ₹10 प्रति लीटर। राज्य सरकारें वैट लगाती हैं, जो 7% से लेकर 31% तक हो सकता है। इसके अलावा डीलर कमीशन और परिवहन लागत भी जुड़ती है। इस तरह, जब उपभोक्ता पेट्रोल पंप पर भुगतान करता है, तो कीमत का लगभग 55% हिस्सा टैक्स होता है। 2014 में जब कच्चे तेल की कीमत $100 प्रति बैरल थी, तब दिल्ली में पेट्रोल ₹61 और डी...

अरावली जीवनरेखा है — इसे बचाना हमारी ज़िम्मेदारी

अरावली: हमारी जीवनरेखा — बचाना हमारा कर्तव्य :- परमिंदर सिंह भाम्बा  अरावली पर्वतमाला केवल पत्थरों और पहाड़ों का समूह नहीं है; यह हमारी सांसों, हमारे जल स्रोतों और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा का आधार है। राजस्थान, हरियाणा, गुजरात और दिल्ली तक फैली यह प्राचीन पर्वतमाला न केवल भौगोलिक महत्व रखती है, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से अनगिनत लोगों की ज़िंदगियों से गहराई से जुड़ी हुई है। अरावली का हर पेड़, हर नाला और हर चट्टान हमारे अस्तित्व से जुड़ा है — इसलिए इसे बचाना कोई विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्य कर्तव्य है।   अरावली थार के रेगिस्तान के फैलाव को रोकने में अहम भूमिका निभाती है और आसपास की उपजाऊ भूमि को रेगिस्तानीकरण से बचाती है। इन पहाड़ियों का भूजल पुनर्भरण में बड़ा योगदान है; वर्षा का पानी यहाँ संचित होकर धीरे-धीरे जमीन में रिसता है और कई गांवों व शहरों के लिए जीवनदायिनी जल उपलब्ध कराता है। अरावली की वनस्पति और जीव-जंतु जैव विविधता के महत्वपूर्ण आवास हैं, जो कई प्रजातियों के अस्तित्व को बनाए रखते हैं। इसके जंगल वायु को शुद्ध करते हैं, तापमान नियंत्रित करते हैं...

Bhambe Sardars of Qila Dharam Singh Bhamba

**Bhambe Sardars and Qila Dharam Singh Bhamba**   **Tehsil Chunia, Thana Maangtawala**   The villages Bhamba Kalan, also known as *Vadaa Bhamba*, and Bhamba Khurd, referred to as *Chota Bhamba*, both located in Kasur, represent the ancestral roots of the illustrious Bhamba family. These villages share a common heritage and descend from the same lineage of ancestors, forming a deep familial and historical bond.   ---   Qila Dharam singh bhamba ( Bhambe da Qila) ### **The Rise of Qila Dharam Singh Bhamba**   During the era of Sikh Misals, Sardar Dharam Singh Bhamba of Bhamba Kalan laid the foundation for what would become an enduring symbol of pride and resilience. About 30 kilometers away from his ancestral village, near the Ravi River, he established a new fort that came to be known as *Qila Dharam Singh Bhamba*. Over time, this monumental structure gained renown as *Bhambe Da Qila*, a name reflecting its significance and its familial le...