Skip to main content

Baadsheya तो raaj kholeya

 Baadsheya toh Raaj kho leya

Das tere toh ki si kholeya

Kis gal karke ,Aisa karke

Saabat saade toh Punjab kholeya

Azadi aisi si kis Kam di

Lakha Da jahaan kholeya

Wand Da dard , kadi nahi mukna

Jiney amratsar toh Lahore kholeya

.. bhambeya kade te dekhan giya akhiya

Qila bhambay diya galaan sab sachiya

Os mitti nu chumna chahwaa

Os nal ghulna milna chahwaa

Bade bujurga diya kamaaiya 

Sachiya toh adhikaar kholeya

Baadsheya toh Raaj kholeya

Lakha Da jahaan kholeya

........by BHAMBA Rajan

Comments

Popular posts from this blog

भारत में ईंधन कर व्यवस्था: संगठित लूट की कहानी

🇮🇳 भारत में ईंधन कर व्यवस्था: संगठित लूट की कहानी By : Parminder Singh bhamba  भारत में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें सिर्फ़ अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के उतार-चढ़ाव पर निर्भर नहीं करतीं, बल्कि इस बात पर भी कि सरकार और तेल कंपनियाँ इनकी कीमतें कैसे तय करती हैं। पिछले दस वर्षों में ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ी हैं, और आम जनता को राहत नहीं मिली। विशेषज्ञ इसे “संगठित लूट” कहते हैं — एक ऐसी व्यवस्था जिसमें सरकार और कंपनियाँ हमेशा लाभ में रहती हैं, जबकि जनता को नुकसान उठाना पड़ता है। भारत लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। रिफाइनरी में तैयार होने के बाद पेट्रोल या डीज़ल की मूल लागत लगभग ₹35–45 प्रति लीटर होती है। इसके ऊपर केंद्र सरकार उत्पाद शुल्क लगाती है — वर्तमान में पेट्रोल पर ₹13 और डीज़ल पर ₹10 प्रति लीटर। राज्य सरकारें वैट लगाती हैं, जो 7% से लेकर 31% तक हो सकता है। इसके अलावा डीलर कमीशन और परिवहन लागत भी जुड़ती है। इस तरह, जब उपभोक्ता पेट्रोल पंप पर भुगतान करता है, तो कीमत का लगभग 55% हिस्सा टैक्स होता है। 2014 में जब कच्चे तेल की कीमत $100 प्रति बैरल थी, तब दिल्ली में पेट्रोल ₹61 और डी...

अरावली जीवनरेखा है — इसे बचाना हमारी ज़िम्मेदारी

अरावली: हमारी जीवनरेखा — बचाना हमारा कर्तव्य :- परमिंदर सिंह भाम्बा  अरावली पर्वतमाला केवल पत्थरों और पहाड़ों का समूह नहीं है; यह हमारी सांसों, हमारे जल स्रोतों और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा का आधार है। राजस्थान, हरियाणा, गुजरात और दिल्ली तक फैली यह प्राचीन पर्वतमाला न केवल भौगोलिक महत्व रखती है, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से अनगिनत लोगों की ज़िंदगियों से गहराई से जुड़ी हुई है। अरावली का हर पेड़, हर नाला और हर चट्टान हमारे अस्तित्व से जुड़ा है — इसलिए इसे बचाना कोई विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्य कर्तव्य है।   अरावली थार के रेगिस्तान के फैलाव को रोकने में अहम भूमिका निभाती है और आसपास की उपजाऊ भूमि को रेगिस्तानीकरण से बचाती है। इन पहाड़ियों का भूजल पुनर्भरण में बड़ा योगदान है; वर्षा का पानी यहाँ संचित होकर धीरे-धीरे जमीन में रिसता है और कई गांवों व शहरों के लिए जीवनदायिनी जल उपलब्ध कराता है। अरावली की वनस्पति और जीव-जंतु जैव विविधता के महत्वपूर्ण आवास हैं, जो कई प्रजातियों के अस्तित्व को बनाए रखते हैं। इसके जंगल वायु को शुद्ध करते हैं, तापमान नियंत्रित करते हैं...

मनरेगा से VB-G RAM G तक – एक लंबी अवधि का लॉलीपॉप और मजदूरों का कानूनी अधिकार खत्म

भारत सरकार द्वारा मनरेगा (MNREGA) को समाप्त कर नई योजना VB-G RAM G (Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission Gramin) लागू करने का प्रस्ताव मजदूरों और राज्यों दोनों के लिए नुकसानदेह साबित हो रहा है। मनरेगा केवल एक योजना नहीं थी, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए कानूनी अधिकार था, जो उन्हें 100 दिन काम की गारंटी देता था और काम न मिलने पर मुआवज़ा माँगने का अधिकार भी प्रदान करता था। नई योजना में 125 दिन काम का वादा तो किया गया है, लेकिन यह केवल एक वादा है, कानूनी गारंटी नहीं । इससे मजदूरों का सबसे बड़ा सहारा छिन गया है।   राज्यों पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा क्योंकि मनरेगा में केंद्र सरकार मजदूरी का अधिकांश खर्च उठाती थी, जबकि VB-G RAM G में केंद्र का हिस्सा घटा दिया गया है और राज्यों पर अधिक वित्तीय बोझ डाल दिया गया है। पहले से ही आर्थिक दबाव झेल रहे राज्यों के लिए यह अतिरिक्त जिम्मेदारी मजदूरों को समय पर काम और भुगतान दिलाने में और मुश्किलें पैदा करेगी।   यह बदलाव केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि मनरेगा को नए नाम और नए तरीके से कमजोर किया गया है । ग्र...