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Punjabi Nursery Rhymes

📘 Punjabi Nursery Rhymes For Little Hearts and Growing Minds Written by: Parminder Singh Bhamba Language: Punjabi (Gurmukhi Script) Genre: Children’s Poetry / Cultural Rhymes Published in: Karnal, Haryana, India Year: 2025 🧡 Dedication This book is lovingly dedicated to my loving daughters . ✍️ Foreword In every rhyme lies a rhythm of heritage. In every word, a whisper of legacy. These Punjabi nursery rhymes are more than playful verses—they are seeds of identity, sown in the hearts of children. Through animals, seasons, colors, and village life, this collection invites young minds to dance with tradition, sing with imagination, and grow with values rooted in love, courage, and unity. Let this book be a bridge between generations. Let it echo with laughter, learning, and light. 📖 Table of Contents ਚੰਨ ਤੇ ਤਾਰੇ – Moon and Stars ਬਿੱਲੀ ਦੀ ਸਾਈਕਲ – Kitty’s Bicycle Ride ਧੋਲੀ ਗ...

अमेरिका और तेल की राजनीति

अमेरिका और तेल की राजनीति कई सालों से अमेरिका की विदेश नीति तेल से जुड़ी रही है। बाहर से यह बात लोकतंत्र, आज़ादी और मानव अधिकारों की लगती है, लेकिन असल में इसमें तेल और ताक़त का खेल छुपा होता है। जिन देशों के पास तेल के बड़े भंडार हैं, वहाँ अमेरिका ने बार‑बार दखल दिया है और हालात बिगाड़े हैं।   इराक इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। 2003 में अमेरिका ने इराक पर हमला किया, यह कहकर कि वहाँ खतरनाक हथियार हैं। बाद में पता चला कि ऐसे हथियार थे ही नहीं। लेकिन इराक के तेल के कुएँ विदेशी कंपनियों के हाथ में चले गए और देश में हिंसा और बर्बादी फैल गई।   लीबिया में भी यही हुआ। गद्दाफी के समय लीबिया अफ्रीका का सबसे विकसित देश था। गद्दाफी ने सोने पर आधारित अफ्रीकी मुद्रा बनाने की योजना बनाई थी, जिससे अमेरिका का तेल‑डॉलर सिस्टम कमजोर हो सकता था। अमेरिका और उसके साथी देशों ने हमला किया, गद्दाफी मारे गए और लीबिया आज तक अस्थिर है।   वेनेज़ुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार हैं। वहाँ अमेरिका ने आर्थिक पाबंदियाँ लगाईं, नेताओं को तानाशाह कहा और सरकार बदलने की कोशिश की। नतीजा यह ...

अरावली जीवनरेखा है — इसे बचाना हमारी ज़िम्मेदारी

अरावली: हमारी जीवनरेखा — बचाना हमारा कर्तव्य :- परमिंदर सिंह भाम्बा  अरावली पर्वतमाला केवल पत्थरों और पहाड़ों का समूह नहीं है; यह हमारी सांसों, हमारे जल स्रोतों और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा का आधार है। राजस्थान, हरियाणा, गुजरात और दिल्ली तक फैली यह प्राचीन पर्वतमाला न केवल भौगोलिक महत्व रखती है, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से अनगिनत लोगों की ज़िंदगियों से गहराई से जुड़ी हुई है। अरावली का हर पेड़, हर नाला और हर चट्टान हमारे अस्तित्व से जुड़ा है — इसलिए इसे बचाना कोई विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्य कर्तव्य है।   अरावली थार के रेगिस्तान के फैलाव को रोकने में अहम भूमिका निभाती है और आसपास की उपजाऊ भूमि को रेगिस्तानीकरण से बचाती है। इन पहाड़ियों का भूजल पुनर्भरण में बड़ा योगदान है; वर्षा का पानी यहाँ संचित होकर धीरे-धीरे जमीन में रिसता है और कई गांवों व शहरों के लिए जीवनदायिनी जल उपलब्ध कराता है। अरावली की वनस्पति और जीव-जंतु जैव विविधता के महत्वपूर्ण आवास हैं, जो कई प्रजातियों के अस्तित्व को बनाए रखते हैं। इसके जंगल वायु को शुद्ध करते हैं, तापमान नियंत्रित करते हैं...

मनरेगा से VB-G RAM G तक – एक लंबी अवधि का लॉलीपॉप और मजदूरों का कानूनी अधिकार खत्म

भारत सरकार द्वारा मनरेगा (MNREGA) को समाप्त कर नई योजना VB-G RAM G (Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission Gramin) लागू करने का प्रस्ताव मजदूरों और राज्यों दोनों के लिए नुकसानदेह साबित हो रहा है। मनरेगा केवल एक योजना नहीं थी, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए कानूनी अधिकार था, जो उन्हें 100 दिन काम की गारंटी देता था और काम न मिलने पर मुआवज़ा माँगने का अधिकार भी प्रदान करता था। नई योजना में 125 दिन काम का वादा तो किया गया है, लेकिन यह केवल एक वादा है, कानूनी गारंटी नहीं । इससे मजदूरों का सबसे बड़ा सहारा छिन गया है।   राज्यों पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा क्योंकि मनरेगा में केंद्र सरकार मजदूरी का अधिकांश खर्च उठाती थी, जबकि VB-G RAM G में केंद्र का हिस्सा घटा दिया गया है और राज्यों पर अधिक वित्तीय बोझ डाल दिया गया है। पहले से ही आर्थिक दबाव झेल रहे राज्यों के लिए यह अतिरिक्त जिम्मेदारी मजदूरों को समय पर काम और भुगतान दिलाने में और मुश्किलें पैदा करेगी।   यह बदलाव केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि मनरेगा को नए नाम और नए तरीके से कमजोर किया गया है । ग्र...

Auna kehda Sokha he a.

  Aaj tu  te mein Te tanhaai  Saambhle adiye mooka he a. ---------- Jaisa marzi  aaj tu karle Aaj toh aghe  Aukha he a. --------- Rukna nahi mein J naa rookey  Aj jazbaat   anokha he a. -------------- Baaki gal  tere te chadi  Onj tere valo  aukha he a ------------ Rajan nu  Paa goli chali Tood naa jaavi Bharosa he a ------------ Tera kehna  Jaake ayi Auna kehda  Sokha he a. ?????????? Chad gal  Dekh  umar nang chali Ishq da dard anokha he a -------------------- Nissing wala  Likhda gaunda  Bhambeya waqt  Nange da ki a. --------------- Rukja bhambeya hor na likh tu Hun , naam kalam te Ohda he  a. ----------- Tera kehna  Jaake ayi Auna kehda  Sokha he a.

बंदी छोड़ दिवस का इतिहास: गुरु हरगोबिंद जी द्वारा 52 राजाओं की मुक्ति की प्रेरणादायक गाथा

  बंदी छोड़ दिवस सिख इतिहास का एक गौरवपूर्ण अध्याय है, जो गुरु हरगोबिंद साहिब जी की न्यायप्रियता, वीरता और करुणा को दर्शाता है। यह दिवस 16 अक्टूबर 1619 को घटित उस घटना की स्मृति में मनाया जाता है जब गुरु जी ने ग्वालियर किले से न केवल स्वयं को बल्कि 52 हिंदू राजाओं को भी मुक्त कराया था। 🛡️ ऐतिहासिक पृष्ठभूमि - गुरु हरगोबिंद जी का जन्म 19 जून 1595 को गुरु अर्जन देव जी और माता गंगा जी के घर हुआ था। - उन्होंने मीरी और पीरी की परंपरा शुरू की—धार्मिक और सांसारिक शक्ति का संतुलन। - गुरु अर्जन देव जी की शहादत के बाद, गुरु हरगोबिंद जी ने सिखों को आत्मरक्षा और युद्धकला में प्रशिक्षित करना शुरू किया। 🏰 ग्वालियर किले में कैद - मुगल सम्राट जहांगीर ने गुरु जी को ग्वालियर किले में कैद कर लिया, जहाँ पहले से 52 हिंदू राजा बंदी थे। - गुरु जी ने अपनी रिहाई की शर्त रखी: जब तक सभी राजा मुक्त नहीं होंगे, वे भी बाहर नहीं जाएंगे। - जहांगीर ने यह शर्त स्वीकार की, लेकिन एक चाल चली—कहा कि जो राजा गुरु जी के वस्त्र को पकड़कर बाहर निकलें, वे ही मुक्त होंगे। 🧵 चोला और मुक्ति - गुरु जी ने 52 कलियों वाला विशेष...

They Only See Caste, Not the Religion

 They Only See Caste, Not the Religion In India’s deeply stratified society, caste often overshadows every other identity—even religion. The recent lynching of Hariom, a 38-year-old Dalit man in Rae Bareli, Uttar Pradesh, is a brutal reminder of this truth. Hariom, who reportedly had Down syndrome, was falsely accused of theft while walking to his in-laws’ home. A mob surrounded him, beat him with belts and sticks, and hurled casteist slurs. In a viral video, he can be heard faintly saying “Rahul Gandhi,” hoping for help, while his attackers laughed and invoked political slogans. His religion didn’t protect him. His disability didn’t soften them. His caste sealed his fate. This tragedy is not an isolated case. According to the National Crime Records Bureau (NCRB), over 50,000 crimes against Scheduled Castes (Dalits) were reported in 2022 alone. Uttar Pradesh accounted for nearly 25% of these cases. These crimes range from murder and rape to public humiliation and social boycotts. W...